कुरान का सार : कुरान में कुछ भी गहरा और आध्यात्मिक नहीं है। हर तर्क काफिर और मोमिन के बीच बंटवारे के इर्द-गिर्द घूमता है। काफिर सबसे बुरे हैं और उन्हें नर्क में भेजा जाएगा और मोमिन सबसे अच्छे हैं और उन्हें स्वर्ग भेजा जाएगा। बाकी जो भी है वह पूर्व-इस्लामी अरब संस्कृति और साहित्य से कॉपी की गई परियों की कहानियां हैं।
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इस्लाम में, सही या गलत की अवधारणा सार्वभौमिक मूल्यों के अनुसार नहीं है बल्कि इसके पैगंबर की पसंद और नापसंद के अनुसार है। जब कि एक सभ्य समाज में लूटपाट, बलात्कार और हत्या सर्वथा अस्वीकार्य और अक्षम्य है, परंतु इस्लाम में, इसे बुरा नहीं माना जाता। इस्लाम अल्लाह के नाम पर हत्या, लूटपाट, बलात्कार की इजाजत देता है।
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गंगा-जमुना तहज़ीब:
हिंदू-स्वामित्व वाले स्थानों पर नमाज, मुहर्रम जुलूस, ईद मिलाप पार्टियां, इफ्तार पार्टियां आदि स्वीकार्य हैं लेकिन बेंगलुरु के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी उत्सव स्वीकार्य नहीं है। भारत में इसे हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कहा जाता है।
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The criticism of Islam as an ideology can not be equated to that of demonizing Muslims. These two things are way apart from each other. Before alleging ex-Muslims for the latter, it should not be forgotten that in most cases, their friends and family are still practicing Muslims.
मुसलमानों को जन्म से ही काफिरों से नफरत करना सिखाया जाता है । उन्हें यह सोचने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है कि काफ़िर गंदे और सबसे बुरे प्राणी होते हैं। अल्लाह क़यामत के दिन, उन्हें नर्क में फेंक देगा और वहां अनंत काल तक उन्हें भूना जाएगा ।
भारत में हिंदू इस्लाम के शिकार हैं लेकिन पीड़ित-कार्ड मुसलमान अपने पास रखते है। जब भी उनके पाखंड और धोखाधड़ी का पर्दाफाश होता है, वे इसे बाहर निकाल देते हैं।
हिंदू-स्वामित्व वाले स्थानों पर नमाज, मुहर्रम जुलूस, ईद मिलाप पार्टियां, इफ्तार पार्टियां आदि स्वीकार्य हैं लेकिन बेंगलुरु के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी उत्सव स्वीकार्य नहीं है। भारत में इसे हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कहा जाता है।
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भारत में, मुल्ला इस्लाम के बारे में हिंदुओं की अज्ञानता का फायदा उठाते हैं। जिस दिन अंतिम हिंदू इस्लाम के मूल सिद्धांतों के बारे में जान जाएगा, इस्लाम अंततः अपना दंश खो देगा।
मुसलमानों को जन्म से ही काफिरों से नफरत करना सिखाया जाता है । उन्हें यह सोचने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है कि काफ़िर गंदे और सबसे बुरे प्राणी होते हैं। अल्लाह क़यामत के दिन, उन्हें नर्क में फेंक देगा और वहां अनंत काल तक उन्हें भूना जाएगा ।
भारत में हिंदू इस्लाम के शिकार हैं लेकिन पीड़ित-कार्ड मुसलमान अपने पास रखते है। जब भी उनके पाखंड और धोखाधड़ी का पर्दाफाश होता है, वे इसे बाहर निकाल देते हैं।
इस्लाम एकतरफा रास्ता है। इस से बाहर नहीं निकला जा सकता। इस्लाम से बाहर निकलने की सजा मौत है। पूर्व-मुसलमानों को अपने मारे जाने का डर सदैव रहता है। अगर मौका दिया जाए तो कट्टर मुसलमान उन्हें कभी भी मार सकते हैं। यह एक बहुत डरावनी स्थिति है।
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